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Wednesday, October 21, 2015

गुवाहाटी अधिवेशन



आप सभी को दशहरे की शुभकामनाएं।
                          -पंडित सुरेश नीरव

Tuesday, January 13, 2015

नयी सुबह की नई किरण ,नये साल का नया सवेरा ।
चिड़िया चहक उठी पेड़ो पर ,निकली अपना छोड़ बसेरा ॥
हम भी अपना आलस्य त्यागें ,छोड़े बिस्तर और घर द्वार ।
अपने कर्मो को कर पूरा ,करे दूर जीवन का अँधेरा  ॥
                                                  रजनी कांत राजू 

Thursday, December 18, 2014

काव्यमंगलम्


कविसम्मेलन

 सर्वभाषा संस्कृति संमन्वय समिति-
                   कविसम्मेलन
24 दिसंबर 2014

Friday, October 10, 2014

सम्पूर्ण स्वच्छता के बतौर,
एक कदम  .......... 
चारित्रिक स्वच्छता की ओर   
घनश्याम वशिष्ठ 

Tuesday, September 23, 2014

मुंह तोड़ जबाब उसे दो , जो सबल हो  
उसे क्या  ,,जो बिला बल हो 
घनश्याम वशिष्ठ 

Friday, September 19, 2014

डायबिटीज़ कर रही है ,बार्डर लाइन क्रॉस ,
फिर भी  चीनी मोह  ………  अफ़सोस  . 
घनश्याम वशिष्ठ 

Tuesday, September 16, 2014

जब कही ही दूसरों के फायदे की ,
क्या खाक कही क़ायदे की  …। 
 घनश्याम वशिष्ठ 

Wednesday, September 10, 2014

यहाँ पग पग  पर फरेब है ,
इन गलियों  में ही ऐब है  . 
घनश्याम वशिष्ठ 

Saturday, September 6, 2014

कर लेतीं वो, इज़हारे  इश्क़  गर 
कट जाते ना ,मेरी आवारगी के पर   
घनश्याम वशिष्ठ 

Friday, August 22, 2014

फिर दो इन्हें, तानाशाही बैसाखी लाकर ,
लड़खड़ा रहे हैं ,लोकतंत्र के पाँव पाकर  . 
घनश्याम वशिष्ठ 

Thursday, August 21, 2014

अंग्रेजों नें  दाँव   जो ,मारा धोबी  पाट 
गए धुरंधर धोनी के ,धूल धरा की चाट  
घनश्याम वशिष्ठ 

Saturday, August 16, 2014

ताको नित निज स्वार्थ को ,अवसर के अनुकूल  . 
सूरज को  जैसे   तके , सूर्यमुखी  का  फूल  
 घनश्याम वशिष्ठ 

Thursday, August 14, 2014

शत्रु क्या खाकर हमारे शौर्य से टकराएगा ,
संतरे सा छील देंगे ,फांक सा रह जाएगा  . 
घनश्याम वशिष्ठ 

Saturday, August 2, 2014

इच्छाओं का, गला घोटकर आ गईं -
ज़रूरतें ,बेचारी का हिस्सा  खा गईं   . 
घनश्याम वशिष्ठ 

Thursday, July 31, 2014

ज़मीन में जगह जगह दरार पद गई ,
अमन  पर,  सूखे  की  मार  पद गई  . 
घनश्याम वशिष्ठ